Skip to main content
 सूचना का अधिकार

संगठन, उसके कार्यों और कर्तव्यों का विवरण

संगठन, उसके कार्यों और कर्तव्यों का विवरण

संगठन का विवरण

  • पंजीकरण की तिथि : 10 अगस्त 1978
  • संगठन का प्रकार : सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत एक सोसायटी
  • प्रशासनिक मंत्रालय : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार.

 

(क) व्यापार संचालन:

  • गैर-लाभकारी संगठन के रूप में, पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए) अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने में लगी हुई है।
  • पीसीआरए उद्योग, कृषि, परिवहन, घरेलू और वाणिज्यिक क्षेत्रों में ऊर्जा के संरक्षण के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों को संचालित करता है।

 

(ख) कार्य और कर्तव्य

  • सोसायटी के ज्ञापन और लेख में निर्दिष्ट उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पीसीआरए स्थापित किया गया है। यह उद्योग, कृषि, परिवहन, घरेलू और वाणिज्यिक क्षेत्रों में ऊर्जा के संरक्षण के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन करता है।

 

कल्पना

  • सतत विकास हेतु अपनी अंतर्निहित शक्ति के द्वारा हाइड्रोकार्बन्स संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा के लिए उत्कृष्टता का केंद्र बनना।

मिशन

  • प्रभावी ऊर्जा-उपयोग एवं पर्यावरण सुरक्षा के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में सुधार।

 

उद्देश्य

  • पेट्रोलियम उत्पादों के अधिकाधिक संरक्षण हेतु रणनीति बनाना तथा तदनुकूल उपाय करना ताकि पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और स्थाई विकास का मार्ग प्रशस्त हो।
  • आम जनता की जानकारी बढाकर तथा सृजित करके पेट्रोलियम उत्पादों के संरक्षण के महत्व, लाभ तथा उसकी विधियों एवं स्वच्छ पर्यावरण के बारे में जागरुकता पैदा करना।
  • पेट्रोलियम एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे अनुसंधान, विकास तथा परिनियोजन प्रयासों को बढावा देना, ईंधन बचाने वाली प्रौद्योगिकियों और पेट्रोलियम उत्पादों के बदले वैकल्पिक एवं नवीकरण योग्य ईंधन को अपनाने तथा इनके प्रसार से जुडे प्रयासों में सहायता करना।
  • पेट्रोलियम संरक्षण एवं पर्यावरण की सुरक्षा के क्षेत्रों में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तरों पर संस्थाओं के बीच कारगर संबंध स्थापित करना।
  • स्वच्छ पर्यावरण हेतु पेट्रोलियम उत्पादों के प्रयोग में मितव्ययिता एवं निपुणता लाने के लिए प्रशिक्षण एवं तकनीकी सलाहकारी सेवाएं प्रदान करना।
  • तेल पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लक्ष्य से पेट्रोलियम संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के संबंध में नीतियाँ एवं रणनीतियाँ प्रस्तावित करने के लिए भारत सरकार के “चिंतन स्रोत” (थिंक टैंक) के रूप में काम करना।